रविवार, 13 अगस्त 2017

पुस्तक समीक्षा
नाटकों से पाठ्यचर्या को बेहतर बनाया जा सकता है
डॉ॰ भारतेंदु मिश्र
बच्चों को सिखाने के लिए नाटक एक सशक्त माध्यम है। आधुनिक समय में अधिकांश विद्यालयों में रचनात्मक शिक्षक इस विधा को अपनी पाठ्यचर्या का हिस्सा बनाने लगे हैं। प्रसंगवश अभी कथाकार बलराम अग्रवाल के 15 ऐसे ही छात्रोपयोगी नाटकों की पुस्तक ‘आधुनिक बाल नाटक’ शीर्षक से प्रकाश में आई है। लघुकथा के क्षेत्र में बलराम अग्रवाल एक बड़ा नाम है। इसके साथ ही बाल साहित्य के क्षेत्र में उनका काम लगातार पढ़ा सराहा जाता रहा है। इस संग्रह में संकलित कई नाटक अनेक प्रदेशों की पाठशालाओं के पाठ्यक्रमों में भी शामिल किये जा चुके हैं। जैसाकि ‘अपनी बात’ में लेखक ने स्पष्ट किया है—इस पुस्तक में संकलित नाटक ‘जरूरी खुराक’ को केरल शिक्षा विभाग द्वारा कक्षा 7 में, ‘पेड़ बोलता है’ को हिमाचल शिक्षा विभाग द्वारा कक्षा 4 में और ‘सूरज का इंतज़ार’ मुम्बई की शिक्षण संस्थाओं द्वारा कक्षा 6 में पढ़ाया जा रहा है। पढ़ाया जा रहा है।
बलराम अग्रवाल अनेक वर्ष रंगमंच पर सक्रिय रहे हैं। अत; माना जा सकता है कि उन्हें नाटक की मूलभूत आवश्यकताओं की समझ है। उन्होंने इन नाटकों को बालमनोविज्ञान की अपनी समझ के आधार पर रचा है। इनमें वर्णित प्रसंगों और दृश्यबंधों को लेखक ने जीवन के दैनन्दिन आयामों से चुना है। ये नाटक यथार्थ जीवन की महत्वपूर्ण जानकारी देने वाले भी हैं और खेल-खेल में बच्चों को जीवन की सीख भी दे जाते हैं। बच्चों के लिए इन नाटकों का बड़ा महत्व है। इस पुस्तक में कुल 15 बाल नाटक संग्रहीत हैं जिन्हें एकांकी और नुक्कड़ के शिल्प में लिखा गया है। इसके साथ ही इन्हें तीन खंडों में विभाजित भी किया गया है। पहले खंड में जीवन के प्रेरक प्रसंगों पर आधारित पाँच नाटक हैं जिनमे  क्रमश: ‘अपना सुल्लू’, ‘जरूरी खुराक’, ‘चमत्कारी छडी’, ‘होई हो हे हे’, ‘लुटेरे राम नाम के’ शामिल हैं। दूसरे खंड में चार नाटक महात्मा गांधी जी  के जीवन के प्रसंगों पर आधारित हैं, जिनके शीर्षक  हैं—‘मोहनदास का साहस’, ‘पश्चात्ताप के आँसू’, ‘सूरज का इंतजार’ और ‘मालिक मजदूर और नेता’। इसी खंड में एक नाटक नेताजी सुभाषचंद्र बोस के जीवन की घटना पर भी केन्द्रित है जिसका शीर्षक है—‘आजादी के दीवाने’। तीसरे खंड में पर्यावरण संरक्षण तथा वृक्षों की उपयोगिता पर केन्द्रित पाँच नाटक हैं, जिनका शीर्षक है—‘पेड़ बोलता है’, ‘पीपल बोलता है’, ‘नीम बोलता है’, ‘बेल बोलता है’ तथा ‘पेड़ बचेगा तभी बचेंगे’।
इन नाटकों की विशेषता यह है कि ये सहजता से बच्चों को उनकी अपनी सरल भाषा में समझ में आने वाले हैं। अध्यापकों द्वारा बिना किसी बड़े इंतजाम के इन्हें विद्यालय स्तर पर खेलाया जा सकता है। जीवन और शिक्षा को जोड़ने के लिए नाटक बेहतरीन प्रयोग तो होता ही है। आधुनिक शिक्षा मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि नाटकों के माध्यम से पाठ्यचर्या को बेहतर बनाया जा सकता है। आशा है पुस्तक में संग्रहीत इन नाटकों से भाई बलराम अग्रवाल को यश मिलेगा और शिक्षा जगत में इस पुस्तक समुचित आदर होगा। लेखक को बधाई।
पुस्तक : आधुनिक बाल नाटक लेखक : बलराम अग्रवाल प्रकाशक : राही प्रकाशन, ए-45, गली नं 5, करतार नगर, दिल्ली-110053 प्रथम संस्करण : 2017 मूल्य : 200 रुपये
समीक्षक संपर्क : डॉ॰ भारतेंदु मिश्र, सी-45/वाई-4 ,दिलशाद गार्डन,दिल्ली-110095
फोन-9868031384 ई-मेल—b.mishra59@gmail.com


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